आज हम जिस क्रॉसवर्ड को मोबाइल या वेबसाइट पर आसानी से खेल लेते हैं, उसकी शुरुआत सौ साल से भी पहले हुई थी। इसकी कहानी जानना दिलचस्प है — खासकर यह समझने के लिए कि यह खेल इतने लंबे समय से लोकप्रिय क्यों बना हुआ है।
दुनिया का पहला प्रकाशित क्रॉसवर्ड 21 दिसंबर 1913 को न्यूयॉर्क वर्ल्ड अखबार में छपा था। इसे आर्थर वेन नाम के एक पत्रकार ने बनाया था, जिन्होंने इसे "वर्ड-क्रॉस पज़ल" नाम दिया — बाद में यह नाम बदलकर "क्रॉसवर्ड" हो गया। शुरुआत में यह सिर्फ एक हीरे के आकार का ग्रिड था, आज जैसा जटिल डिज़ाइन नहीं था।
1920 के दशक में क्रॉसवर्ड अमेरिका में इतना लोकप्रिय हो गया कि लोग सार्वजनिक जगहों — जैसे ट्रेन और बस — में भी इसे हल करते हुए दिखने लगे। इसी दौर में पहली क्रॉसवर्ड किताबें भी छपनी शुरू हुईं, जो बेस्टसेलर बनीं।
भारत में क्रॉसवर्ड अंग्रेज़ी अखबारों के ज़रिए पहुंचा, और धीरे-धीरे हिंदी अखबारों और पत्रिकाओं ने भी अपने पाठकों के लिए हिंदी क्रॉसवर्ड बनाने शुरू किए। आज डिजिटल युग में हिंदी क्रॉसवर्ड मोबाइल और वेबसाइट पर आसानी से उपलब्ध है, जिससे नई पीढ़ी भी इसे खेल और सीख पा रही है।
खुद इतिहास का हिस्सा बनें, अभी खेलें:
📝 क्रॉसवर्ड खेलेंक्रॉसवर्ड की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह उम्र, भाषा या पेशे की सीमा नहीं मानता — बच्चे से लेकर बुज़ुर्ग तक कोई भी इसे खेल सकता है। साथ ही यह दिमाग को सक्रिय रखने का एक हल्का-फुल्का तरीका है, जो शायद इसकी लंबी उम्र का सबसे बड़ा राज़ है।
सौ साल से ज़्यादा पुराना यह खेल आज भी उतना ही ताज़ा और मज़ेदार लगता है जितना 1913 में लगा होगा। हिंदी क्रॉसवर्ड इस पुरानी परंपरा को एक नई भाषा और नए रूप में आगे बढ़ाने का एक छोटा प्रयास है।