"अलंकार" शब्द का अर्थ है आभूषण। जिस तरह गहने पहनने से किसी व्यक्ति का सौंदर्य बढ़ता है, उसी तरह अलंकार किसी कविता या वाक्य की सुंदरता को बढ़ाते हैं। हिंदी साहित्य में अलंकार का अध्ययन काव्य को गहराई से समझने के लिए ज़रूरी है।
अलंकार को मुख्यतः दो भागों में बांटा जाता है:
| भेद | पहचान |
|---|---|
| शब्दालंकार | शब्दों की बनावट/ध्वनि से सौंदर्य आता है |
| अर्थालंकार | शब्दों के अर्थ से सौंदर्य आता है |
अनुप्रास अलंकार — जब एक ही वर्ण या ध्वनि बार-बार आए, जैसे "चारु चंद्र की चंचल किरणें"।
यमक अलंकार — जब एक ही शब्द दो बार आए लेकिन दोनों बार अर्थ अलग हो।
श्लेष अलंकार — जब एक ही शब्द के एक साथ दो अर्थ निकलें।
उपमा अलंकार — दो अलग-अलग चीज़ों की तुलना, जैसे "मुख चंद्रमा के समान सुंदर है"।
रूपक अलंकार — उपमेय को उपमान जैसा ही मान लेना, जैसे "चरण-कमल"।
उत्प्रेक्षा अलंकार — कल्पना के आधार पर संभावना व्यक्त करना, जैसे "मानो चांदनी बरस रही हो"।
शब्दों के साथ खेलते हुए सीखें:
🔍 शब्द खोज खेलेंयह सबसे ज़्यादा भ्रमित करने वाला हिस्सा है। उपमा में तुलना के शब्द (जैसे, सा, सी, समान) स्पष्ट रूप से मौजूद होते हैं — "मुख चांद जैसा है"। रूपक में इन शब्दों को हटाकर सीधे दोनों को एक मान लिया जाता है — "मुख-चंद्र"। यही एक फर्क याद रखने से दोनों अलंकार आसानी से पहचाने जा सकते हैं।
अलंकार सीखने के लिए हर प्रकार के 2-3 उदाहरण अच्छी तरह याद रखें, और कविताएं पढ़ते समय खुद पहचानने की कोशिश करें कि कौन-सा अलंकार इस्तेमाल हुआ है। यह अभ्यास न सिर्फ परीक्षा में मदद करता है, बल्कि काव्य पढ़ने का आनंद भी बढ़ा देता है।